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बिहार विधानसभा में कल मेजॉरिटी साबित करेंगे नीतीश, ये हैं 3 समीकरण

पटना. नीतीश कुमार शुक्रवार को बिहार विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। वैसे तो NDA के साथ आने से उन्हें 122 सीटों का आंकड़ा छूने में दिक्कत नहीं आएगी लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि कुछ विधायक पाला भी बदल सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो नीतीश और उनके नए अलायंस पार्टनर NDA को दिक्कत हो सकती है। बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं। बहुमत का आंकड़ा 122 है। ये हैं तीन समीकरण...

1) NDA का पूरा साथ कायम रहा तो जीत जाएंगे
- नीतीश की पार्टी जेडीयू के पास 71 विधायक हैं। बहुमत का आंकड़ा 122 है। ऐसे में जेडीयू को 51 विधायकों की जरूरत है। NDA का साथ मिलने पर जेडीयू को 58 और विधायकों का समर्थन मिला है। अब उनके पास 129 विधायक हो गए हैं। ये बहुमत से 7 ज्यादा हैं। सुशील मोदी 132 विधायकों के समर्थन की बात कह रहे हैं। ये सपोर्ट कायम रहा तो नीतीश को मेजॉरिटी हासिल करने में दिक्कत नहीं आएगी।
2) जेडीयू में टूट हुई तो....
- आरजेडी के 80 और कांग्रेस के 27 विधायक हैं। इनका फिगर 107 होता है। इसमें बहुमत के लिए 15 विधायक कम पड़ते हैं। तेजस्वी का दावा है कि जदयू के 24 विधायक उनके संपर्क में हैं। अगर आरजेडी जेडीयू के 24 विधायकों को तोड़ने में कामयाब रहती है तो खेल बदल भी सकता है। नीतीश फ्लोर टेस्ट में फेल हो सकते हैं।
3) लालू ने केस किया तो
- इस्तीफा देने के बाद नीतीश ने राज्यपाल के सामने एनडीए के सपार्ट से नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इसके बाद राज्यपाल ने नीतीश को मौका दिया। आरजेडी इसे गलत बता रही है। उसका कहना है कि उनके पास सबसे ज्यादा 80 विधायक हैं, इसलिए सरकार बनाने का पहला मौका उन्हें मिलना चाहिए था। ऐसा ना होने पर लालू यादव ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने की भी बात कही है। हालांकि, इससे लालू को कितना फायदा मिलता है यह अभी साफ नहीं है।
पिटीशन दायर, लेकिन सुनवाई सोमवार को
पटना हाईकोर्ट के वकील दिनेश खुर्पीवाला ने जनहित याचिका दायर की है। पिटीशन में कहा गया है कि नीतीश की नई सरकार बनवाने में राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने संविधान के निर्देशों का सही तरह से पालन नहीं किया। हालांकि, इस पिटीशन पर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
- सीबीआई ने 5 जुलाई को लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 7 जुलाई को सुबह CBI ने लालू से जुड़े 12 ठिकानों पर छापे मारे। जांच एजेंसी के मुताबिक 2006 में जब लालू रेलमंत्री थे, तब रांची और पुरी में होटलों के टेंडर जारी करने में गड़बड़ी की गई।
- इसके बाद तेजस्वी के इस्तीफे की मांग उठने लगी। मामला तब गरमा गया जब नीतीश कुमार की अगुआई में इस मसले पर 11 जुलाई को जेडीयू की अहम बैठक हुई।
- इससे पहले मई से ही लालू और उनके परिवार के खिलाफ 1000 करोड़ की बेनामी प्रॉपर्टी के आरोपों की इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जांच कर रहा था। मीसा और उनके पति के ठिकानों पर भी छापे मारे जा चुके थे।
जेडीयू ने कब रुख सख्त किया?
- तेजस्वी पर एफआईआर के बाद जेडीयू ने कहा कि जिन पर आरोप लगे हैं, वे जनता ले सामने फैक्ट्स के साथ जवाब दें। इस्तीफे के बाद भी नीतीश ने यही बात दोहराई कि उन्होंने तेजस्वी से इस्तीफा नहीं सिर्फ सफाई मांगी थी। जेडीयू ने कभी करप्शन के मामले में समझौता नहीं किया है। हमने तो इसकी मिसाल पेश की है। फिर चाहे वे जीतनराम मांझी का मामला हो या अनंत सिंह का। नीतीश कुमार अपनी छवि और भ्रष्टाचार की समस्या से समझौता नहीं करेंगे।
चार कारण: जिसकी वजह से खराब हो रही थी नीतीश की छवि, बदलना पड़ा सहयोगी
1) पेट्रोल पंप घोटाला: लालू यादव के बेटे तेज प्रताप पर धोखाधड़ी के जरिये पटना के नजदीक बेऊर पेट्रोल पंप हासिल करने का आरोप लगा। जब तेज प्रताप पेट्रोल पंप के लिए इंटरव्यू में बैठे, तब वे बेऊर की उस 43 डिसमिल जमीन के मालिक नहीं थे जिसका दावा किया था।

2) बेटियों के नाम शेल कंपनियां: तेजस्वी के खिलाफ बिहार के सबसे बड़े मॉल का प्रमोशन कर रही कंपनी में भारी शेयर रखने का आरोप है। लालू की तीन बेटियों के खिलाफ भी शेल कंपनियों में डायरेक्टर होने का आरोप हैं। लालू परिवार पर करोड़ों रुपए के भारी-भरकम फ्री गिफ्ट भी जांच के दायरे में है।

3) मनी लॉड्रिंग केस: ईडी ने लालू की बेटी मीसा भारती की कंपनी से जुड़े एक चार्टर्ड एकाउंटेंट को गिरफ्तार किया। उस पर आठ हजार करोड़ रुपए की मनी लॉड्रिंग का आरोप। मीसा और उनके पति से लगातार पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।

4) बेनामी संपत्ति जब्ती: 20 जून को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने लालू यादव के रिश्तेदारों की 12 संपत्तियां जब्त कीं। ये संपत्ति लालू की बेटी मीसा और उनके पति शैलेश कुमार की है। तेजस्वी और राबड़ी देवी, रागिनी और चंदना यादव की हैं। इन संपत्तियों का मार्केट वैल्यू 175 करोड़ से ज्यादा है।

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