महाकाल सवारी : राजाधिराज ने उमा-महेश रूप में दिठदरà¥à¤¶à¤¨
उजà¥à¤œà¥ˆà¤¨à¥¤ शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤£ मास में सोमवार को जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग à¤à¤—वान महाकाल की चौथी सवारी निकली। अवंतिकानाथ ने à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को चार रूपों में दरà¥à¤¶à¤¨ दिà¤à¥¤ राजाधिराज रजत पालकी में चंदà¥à¤°à¤®à¥Œà¤²à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤°, हाथी पर मनमहेश, गरà¥à¥ पर शिवतांडव तथा नंदी पर उमा-महेश रूप में निकले।
मंदिर के सà¤à¤¾à¤®à¤‚डप में पूजन के बाद शाम 4 बजे राजा की पालकी नगर à¤à¥à¤°à¤®à¤£ के लिठरवाना हà¥à¤ˆà¥¤ परंपरागत मारà¥à¤—ों से सवारी शाम करीब 5 बजे मोकà¥à¤·à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ शिपà¥à¤°à¤¾ के तट रामघाट पहà¥à¤‚ची। यहां शिपà¥à¤°à¤¾ जल से महाकाल का अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• कर पूजा अरà¥à¤šà¤¨à¤¾ की गई। पूजन पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ सवारी शाम 5.30 बजे मंदिर की ओर रवाना हà¥à¤ˆà¥¤