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तस्वीरों में देखिए इंदौर में हुए बेली डांस का अलग अंदाज

बेली डांस की शुरुआत को लेकर एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग हो सकती है, मगर इसके लिए जरूरी बदन की लोच और संतुलन को लेकर सभी एकमत हैं। इस लचक और बैलेंस के साथ बेली डांसर्स का कमाल का तालमेल भी रविवार रात शिमरिंग स्टूडियो द्वारा आयोजित बेली डांस कार्यक्रम में नजर आया। इसमें कोरियोग्राफर सोनल अरोरा के निर्देशन में करीब दो दर्जन नृत्यांगनाओं ने अपने हुनर की उम्दा नुमाइश के जरिए ऑडियंस को कभी झूमने पर मजबूर किया तो कभी वो दांतों तले अंगुली दबाते नजर आए।

ट्रेडिशनल से लेकर मॉडर्न डांस स्टाइल की झलक

अपनी तरह की इस अनूठी पेशकश में बेली डांस के ट्रेडिशनल क्लासिकल फॉर्म के साथ उसका आधुनिक रूप भी नजर आया। जिसमें स्कार्फ और तलवार जैसे प्रॉप्स का भी शानदार इस्तेमाल किया गया।

इस बीच माहौल चेंज करने के लिहाज से कालबेलिया और भांगड़ा जैसे भारतीय लोकनृत्यों के साथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय नृत्यों में शुमार कथक की भी प्रस्तुति दी गई।

 

लोवर, अपर बॉडी पोर्शन का शानदार इस्तेमाल

 

इन रंगारंग प्रस्तुतियों की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद कलाकारों ने कैंडल ट्रे बेली डांस का प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कैंडल ट्रे में जलती मोमबत्तियां सिर पर रखकर बेली करना आसान नहीं था।

 

मगर नृत्यांगनाओं ने दर्शाया कि लगातार रियाज से उन्होंने इस मुश्किल नृत्य को भी बखूबी साध लिया है। इसके बाद बारी थी बेली डांस का शुद्ध रूप माने जाने वाले खलीजी नृत्य की। इसमें लोवर के मुकाबले अपर पोर्शन ज्यादा मूव होता है। ये परंपरागत नृत्य कवर्ड कुर्ते जैसा कास्ट्यूम 'थोप' पहनकर किया जाता है।

 

ड्रम सोलो और फैन वेल

ड्रम सोलो में बेली का टेक्निकल फॉर्म नजर आया। इसमें मेलोडी पोर्शन जहां बहुत कम था, वहीं मूवमेंट काफी शार्प थे। इस डांस फॉर्म में अपर पोर्शन के बजाय हिप एरिया का मूवमेंट ज्यादा अहम रहा। ताल पक्ष की इस शैली के शानदार बीट्स ने हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया।

 

इसके बाद बारी थी बेली की 'फैन वेल' शैली की। जिसके तहत ऊपर लटके सिल्क के दुपट्टों के सहारे दर्शकों को एक अलग तरह का बेली देखने को मिला।

 

नए कलाकारों द्वारा पेश बेली डांसिंग फ्यूजन के बाद कार्यक्रम के अंत में बेली की अलग-अलग शैलियों के मिश्रण से सजा नृत्य पेश किया गया।

 

 

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