भारतीय शेयर बाजार पर पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर बुधवार को स्पष्ट दिखा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,122.66 अंक यानी 1.40 प्रतिशत गिरकर 79,116.19 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 385.20 अंक या 1.55 प्रतिशत टूटकर 24,480.50 के स्तर पर आ गया। वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गई।
कौन से क्षेत्र सबसे ज्यादा दबाव में रहे?
बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव धातु से जुड़ी कंपनियों के शेयरों का रहा। निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा गिरने वाला समूह रहा, जिसमें करीब 4 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, रियल एस्टेट, तेल और गैस, मीडिया, कमोडिटी और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। पूरे बाजार में केवल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से जुड़े शेयरों में हल्की बढ़त देखने को मिली और यह समूह मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।
निफ्टी पीएसयू बैंक 3.24 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 3.11 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 3.09 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 3.05 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 2.87 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई 2.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। सूचकांकों में केवल निफ्टी आईटी ही 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।मिडकैप-स्मॉलकैप का क्या हाल रहा?
बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली रही। मिडकैप सूचकांक करीब 2.16 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक लगभग 2.11 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। बाजार में उतार-चढ़ाव दर्शाने वाले इंडेक्स इंडिया विक्स में 23 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली, जो बाजार में बढ़ती अस्थिरता को दिखाता है।
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में भारती एयरटेल, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा में बढ़त रही, जबकि टाटा स्टील, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एनटीपीसी, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, एचयूएल, ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, मारुति सुजुकी और बीईएल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
रुपये की कीमत सर्वकालिक निचले स्तर पर
ईरान संकट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आने के कारण आज रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 67 पैसे टूटा और यह अपने सर्वकालिक निचले स्तर 92.16 पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संकट के बीच दुनियाभर में जोखिम का माहौल बना हुआ है, जिसके चलते डॉलर सूचकांक 98 के स्तर को पार कर गया। इससे रुपये और दबाव बढ़ गया। उन्होंने बताया कि घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली और विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी ने भी भारतीय मुद्रा को कमजोर करने में भूमिका निभाई।