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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आज अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली। महिलाओं को समान अधिकार देने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान और à¤¯à¥‚निफॉर्म सिविल कोड की सुगबुगाहट पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य मुस्लिम संगठन आज एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के लिए जमीन तैयार कर रही है और इस काम के लिए लॉ कमीशन भी उसकी मदद कर रहा है। मुस्लिम संगठनों के मुताबिक कमीशन ने आम जनता से जो सुझाव मांगे हैं, वो सिर्फ मुस्लिम पर्सनल लॉ को टारगेट करने के लिए है।

बता दें कि लखनऊ की रामलीला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर धर्म-जाति में महिलाओं को न्याय दिलाने की वकालत करते हुए महिलाओं को समान अधिकार देने की बात कही थी। पीएम ने ऐशबाग की रामलीला के मंच से कहा कि हर धर्म की बेटी को एक जैसे अधिकार मिलने चाहिए।

पीएम के इस बयान के बाद ही मुस्लिम संगठनों ने सरकार को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सलन लॉ बोर्ड आज एक प्रेस कॉन्फ्रेस कर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है।

मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली के मुताबिक हमारे मजहब का एक अहम हिस्सा है, तो हमारे मजहबी कानूनों में हमें किसी तरह की दखल पंसद नहीं है।  मुस्लिम संगठन साथ है ट्रिपल तलाक लॉ हमारी शरियत के कानून का एक हिस्सा है, उसमें भी हमें किसी भी तरह की तब्दीली पसंद नहीं है और यूनिफॉर्म सिविल कोड भी हमारे लिए लागू नही हो पाएगा।

तीन तलाक और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कांग्रेस नेता मीम अफजल ने कहा है कि कोई भी रिफॉर्म समुदाय के अंदर से आना चाहिए। सरकार उस पर थोप नहीं सकती। समुदाय में इस पर चर्चा हो रही है और उसको वक्त देना चाहिए। सरकार की मंशा ठीक नहीं है।

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि हम चाहते हैं कि कॉमन सिविल कोड के एक-एक बिंदु पर चर्चा हो। सरकार कॉमन सिविल कोड के जरिए आरएसएस का एजेंडा लागू करना चाहती है।

वहीं, तीन तलाक का विरोध करने वाले मुस्लिम समाज में भी कम नहीं हैं और इस समाज का एक बड़ा वर्ग तीन तलाक की प्रथा को बंद करने की पैरवी कर रहा है। मुस्लिम विद्वान सईद याशिर जिलानी के मुताबिक एक रात में तलाक देने के बाद हमारी बहनें क्या महसूस करती हैं? इस पर मुस्लिम लॉ बोर्ड का क्या करना है? इस प्रकार तलाक देने में महिलाओं का सम्मान नहीं है। इस्लाम महिलाओं का सम्मान करता है।

बीजेपी नेता जफर इस्लाम ने कहा है कि मुस्लिम लोगों को समझना चाहिए कि यह आवाज मुस्लिम समुदाय के लोगों की तरफ से ही उठी है, इसलिए उन्होंने केंद्र सरकार से अपील कर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और मलेशिया कहीं ट्रिपल तलाक का कॉन्सेप्ट नहीं है। हमारे यहां ज्यादा है।

आपको बता दें कि दुनिया के कई इस्लामिक देशों में एक बार में तीन तलाक पर पाबंदी है। पाकिस्तान में 1961 से, बंग्लादेश में 1971 से, मिश्र में 1929 से, सूडान में 1935 से और सीरिया में 1953 से  तीन तलाक पर बैन लगा हुआ है। पिछले हफ्ते केंद्र सकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख साफ किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस्लाम में तीन तलाक जरूरी धार्मिक रिवाज नहीं है और वह तीन बार तलाक बोलने की प्रथा का विरोध करती है। केंद्र सरकार ने चीफ जस्टिस टी.एस. ठाकुर की अध्क्षता वाली बेंच के सामने हलफनामा दायर कर कहा कि लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा ऐसी चीज हैं, जिन पर समझौता नहीं किया जा सकता है।

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